यह बात तब की है, जब मैं Class 11 में थी। हम सब दोस्तों को music period बहुत पसंद था। उस दिन music class थी और पूरी class music room गई। ख़ासकर हम लड़कियों को वो room इसलिए पसंद था क्योंकि वहाँ कोई pressure नहीं होता था—ना file submission, ना project completion, ना homework, ना classwork का stress। वहाँ सिर्फ़ sur और taal होते थे। हम अच्छे singer नहीं थे, लेकिन हमें गाना बहुत पसंद था।
हमारे music teacher Sharma Sir थे। वो आमतौर पर बहुत jolly और kind इंसान थे, लेकिन उस दिन मुझे लगा कि वो अच्छे mood में नहीं थे। उन्होंने हमें choir में खड़ा किया और खुद गाना शुरू किया ताकि हम उनके पीछे-पीछे गा सकें। उसी दौरान मैं पता नहीं क्यों थोड़ी mischievous हो गई और अपने बगल में खड़ी अपनी friend Nidhi Vajpayee को tickle करने लगी। मैं ऐसा करती रही और वो हँस पड़ी। उसकी हँसी तेज़ नहीं थी, बस बहुत हल्की-सी आवाज़ थी, लेकिन वही छोटी-सी आवाज़ Sharma Sir के ग़ुस्से को भड़का गई और उन्होंने Nidhi के गाल पर थप्पड़ मार दिया।
उसी पल bell बज गई और period खत्म हो गया। मैं Nidhi की तरफ़ सीधे देखने की हिम्मत नहीं कर पाई। मुझे साफ़ पता था कि गलती मेरी थी, उसकी नहीं। मैं उससे sorry कहना चाहती थी, लेकिन मेरी आवाज़ ही साथ नहीं दे रही थी। मैंने उसकी तरफ़ चोरी से देखा—उसकी आँखों में आँसू थे और उसका गाल थप्पड़ की वजह से लाल था। वो दृश्य मेरे मन में बस गया। पूरा दिन “sorry” शब्द मेरे दिमाग़ में घूमता रहा, लेकिन कह नहीं पाई। फिर दिन बीतते गए, स्कूल बदल गया, ज़िंदगी आगे बढ़ गई और वो माफ़ी कभी कही नहीं जा सकी।
आज, इतने सालों बाद, ये कहना ज़रूरी लगा। Nidhi, तुम जहाँ भी हो, अगर कभी ये पढ़ो, तो बस इतना जान लो—मुझे माफ़ कर देना। दिल से। सच में। पूरी ईमानदारी से।
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